नम और शुष्क दौर

कृषि मौसम विज्ञान प्रभाग की अनुसंधान गतिविधियों पर वापस

सभी 35 मौसम विज्ञान उप-मण्डलों के कुछ चुनिंदा स्टेशनों हेतु मार्कोव चेन माडल उपयोग से नम और शुष्क दौरों के वितरण का विश्लेषण पूर्ण किया गया है । इनके आधार पर, एक अनावृष्टि सूचकांक विकसित किया गया है तथा प्रवण क्षेत्रों को सीमांकित किया गया है । कुछ राज्यों के लिए शुष्क और नम दौरों का फैलाव भी परिकलित किया गया है ।

इस अध्ययन में मार्कोव चेन माडल का प्रयोग पांच उप-मण्डलों के जिलों में नम दौर की प्रसंभाव्यताएं प्राप्त करने के लिया किया गया है । ये हैं पंजाब, पूर्व मध्य प्रदेश, पश्चिम उत्तर प्रदेश के मैदान, गांगेय पश्चिम बंगाल और केरल । उस उद्देश्य के लिए उप-मण्डलों में सभी उपलब्ध स्टेशनों के लिए 1901-1990 की अवधि के दैनिक वर्षा आंकड़ों को विचारार्थ लिया गया है ।

ऐसी कई मौसम संवेदी संक्रियाएं हैं जिनके लिए निश्चित मात्रा की वर्षा होने की आवश्यकता तथा दी गई प्रसंभाव्यता के साथ क्रांतिक अवधि के लिए उसकी निरंतरता आवश्यक है । प्रसंभाव्यता विश्लेषण गणितीय उपायों के अध्ययन से कहीं अधिक फायदेमंद है तथा देश के विभिन्न भागों में जल संसाधन प्रबंधन में सहायक है ।

सप्ताह उस समय नम कहलाता है जब उस सप्ताह के लिए वर्षा की मात्रा मानसून ऋतु के लिए वर्षा की सी.वी. पर आधारित निर्धारित देहली मान से अधिक तथा सप्ताह में 3 दिनों के लिए 1 मि.मी. या अधिक की वर्षा की सूचना कुल स्टेशनों की संख्या के कम से कम 50% स्टेशनों से होगी । अध्ययन में जो सप्ताह ‘नम’ सप्ताह नहीं है उसे ‘शुष्क’ सप्ताह माना जाएगा ।