भारत के ऊपर ओस निक्षेपण

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पौध संवृद्धि के लिए, ओस आर्द्रता का एक महत्वपूर्ण स्रोत है । विशेषतया शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायविक क्षेत्रों में जहां वर्षा की मात्रा कम है, यह अति उपयोगी है । इस प्रकाशन में देश में 79 स्टेशनों के मासिक ओस आंकड़ें दिए गए हैं ।
निशा विकिरण से शीतल हुई सतह पर पार्श्वस्थ स्वच्छ हवा से जल वाष्प के सीधे संघनन द्वारा जल बूंदों का निक्षेपण, इस प्रकार ओस को परिभाषित किया गया है ।
ओस वर्षा-रहित ऋतु के दौरान फसलों के लिए आर्द्रता का महत्वपूर्ण द्वितीयक स्रोत है तथा पौध संवृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । ओस की घटना पौधों के लिए कई तरह से उपयोगी है जैसे

(1) पत्ती की सतह द्वारा अवशोषण से पौधों द्वारा सीधा प्रयोग होता है ।
(2) वाष्पोत्सर्जन कम करता है और आर्द्रता संरक्षण में मदद करता है ।
(3) (3) रात्रि के समय पत्तियों की जल संतृप्ति के कारण दोपहर समय में पौधों द्वारा प्रकाशसंश्लेषण त्वरण में सहायता करता है ।

ये सभी फायदे विशेषतया शुष्क तथा अर्ध-शुष्क क्षेत्रों महत्वपूर्ण है । भारत में मौसम विज्ञान विभाग भू सतह से 4 ऊंचाइयों पर 5, 25, 50 और 100 सें.मी. पर ओस रिकार्ड करता है ।

स्टेशनों का संजाल
भारत में 1968 से ओस मापन आरंभ हुआ और वर्तमान में 75 स्टेशनों पर रिकार्ड होता है । इन स्थलों का वितरण चित्र 1 में दिखाया है । ओस निक्षेपण सामान्य मूल्य बनाने में न्यूनतम 5 वर्षों की अवधि का चयन किया गया है । सामान्य मूल्य बनाने में 1969-88 अवधि का उपयोग किया है ।

आंकड़ों का प्रस्तुतिकरण
भारत के विभिन्न भागों में सितम्बर से अप्रैल तक अधिकतर ओस देखा जाता है । ऊपर दी गई प्रत्येक चार ऊंचाइयों पर ओस निक्षेपण की औसत मासिक मूल्यों को दैनिक मूल्यों से परिकलित किया गया है तथा इस प्रकाशन में दिया गया है । ओस वाली रात्रियों की संख्या को दर्शाया गया है । ऋतु का कुल (अर्थात सितम्बर से अप्रैल का) भी परिकलित किया गया तथा दर्शाया गया है ।